Farmer Protest: किसान अपनी मांगों को लेकर फिर से सड़कों पर हैं. दिल्ली से लगे पंजाब-हरियाणा के बॉर्डर पर किसान डेरा डाले बैठे हैं. कई मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य मेन मांग है. सरकार और किसान नेताओं के बीच कई राउंड की बैठक हो चुकी है, लेकिन अभी बात नहीं बनी है. पेंच न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देने पर अटकी है. किसान एमएसपी पर सरकार के लीगल गारंटी की मांग कर रहे हैं.
रविवार को किसान नेताओं के साथ चौथे दौर की बैठक में केंद्र सरकार ने एमएसपी पर नया प्रस्ताव दिया था. सरकार का प्रस्ताव था कि पांच साल तक दाल, मक्का और कपास को एमएसपी पर खरीदा जाएगा. किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया.
सरकार अभी 23 फसलों पर एमएसपी तय करती है. हर साल इन फसलों के दाम तय किए जाते हैं. धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी और जौ ये सात अनाज. तिलहन में मूंगफली, सोयाबीन, सरसों, तिल, सूरजमुखी, नाइजर बीज या काला तिल और कुसुम. चना, अरहर, मूंग, उड़द और मसूर दलहन की फसलें हैं. इसके अलावा 4 कमर्शियल फसलें गन्ना, कपास, खोपरा और जूट शामिल हैं. इन फसलों केंद्र सरकार की एजेंसी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस एमएसपी की सिफारिश करती है. इसके बाद सरकार एमएसपी तय करती है.
1960 के दशक में देश में आनाज का संकट पैदा हुआ. तब सरकार ने एमएसपी लागू किया. धान और गेहूं पर पहली एमएसपी तय की गई थी. एमएसपी पर किसानों की मांग जायद है. क्योंकि ये एक नीति है, कानून नहीं. और सरकार जब चाहे इसे बंद कर सकती है या रोक सकती है. शांता कुमार कमेटी के रिपोर्ट का दावा है कि देश के महज 6 फीसदी किसानों की फसल ही एमएसपी पर खरीदी जाती है. देश में अभी ज्यादातर किसान एमएसपी पर अपनी फसलों को नहीं बेच पाते हैं. किसानों के पास अपना हक मांगना का कोई कानून नहीं है.
अभी सरकार 23 फसलों के लिए एमएसपी तय करती है. लेकिन मुख्य रूप से सिर्फ गेहूं और धान की खरीद ही होती है. अगर इसपर कानून बन जाता है तो सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदना सरकार की मजबूरी बन जाएगी. साथ ही कॉर्पोरेट घराने भी किसानों के साथ धोखा करने से डरेंगी.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन 2022-23 में एमएसपी पर धान की खरीद के लिए 1.74 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए. वहीं, रबी सीजन 2022-23 में गेहूं खरीदने के लिए 55,679 करोड़ रुपये खर्च किया था. आंकड़ों के मुताबिक सभी फसलों को एमएसपी पर खरीद के लिए 2022-23 में 2.38 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे. एमएसपी पर सबसे ज्यादा फसलें पंजाब और हरियाणा के किसान बेचते हैं.