menu-icon
India Daily

'सरकार की हिंदू-हिंदी-हिंदुस्तान राजनीति चिंता का सबब..' जानें उत्तर-दक्षिण की चल रही सियासत पर क्या बोले शशि थरूर?

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिंदू-हिंदी-हिंदुस्तान राजनीति की विभाजनकारी प्रकृति पर चिंता व्यक्त की. BJP की उत्तर-दक्षिण विभाजन के बारे में बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि इसने कई दक्षिणी राजनेताओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है.

Avinash Kumar Singh
'सरकार की हिंदू-हिंदी-हिंदुस्तान राजनीति चिंता का सबब..' जानें उत्तर-दक्षिण की चल रही सियासत पर क्या बोले शशि थरूर?

हाइलाइट्स

  • शशि थरूर ने हिंदू-हिंदी-हिंदुस्तान राजनीति को लेकर दिया बड़ा बयान
  • 'केंद्र सरकार की वजह से उत्तर-दक्षिण विभाजन गहरा'

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिंदू-हिंदी-हिंदुस्तान राजनीति की विभाजनकारी प्रकृति पर चिंता व्यक्त की. BJP की उत्तर-दक्षिण की सियासत के बारे में बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि इसने कई दक्षिणी राजनेताओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है. चेन्नई में एक पत्रिका की 54वीं वर्षगांठ समारोह में बड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए शशि थरूर ने कहा "अगर दक्षिण को राजनीतिक रूप से वंचित होने का सामना करना पड़ता है, साथ ही वित्तीय उत्पीड़न की भावना भी आती है, तो इससे आक्रोश पैदा होना तय है जो हमारी नियमित राजनीति की सीमाओं तक फैल सकता है. मैं नहीं चाहता कि भारत की एकता और अखंडता को किसी भी तरह से खतरा हो. मुझे हिंदू-हिंदी-हिंदुस्तान राजनीति को लेकर चिंता है."  

'केंद्र सरकार की वजह से उत्तर-दक्षिण विभाजन गहरा' 

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भारत के संघवाद की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की. थरूर ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री सहकारी संघवाद की बात करते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि केवल राज्यों से ही सहयोग की उम्मीद की जाती है और केंद्र सरकार अपनी मनमर्जी से काम करती है. उन्होंने कहा कि यूपी द्वारा दिए गए प्रत्येक 1 रुपये के लिए केंद्र से 1.79 रुपये मिलते हैं. वहीं, जब कर्नाटक 1 रुपया देता है तो उसे 0.47 रुपये वापस मिलते हैं. यही अंतर है. इसने उत्तर-दक्षिण विभाजन को गहरा कर दिया है. दक्षिण से और भी अधिक पैसा अब उत्तर में भेजा जा रहा है.

जानें शशि थरूर ने क्यों की कर्नाटक और बिहार की तुलना 

राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता के बारे में बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि कर्नाटक अपने खर्चों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अपने करों से वित्त पोषित करता है, जबकि बिहार इसके विपरीत है, जो वित्त पोषण के लिए केंद्र सरकार पर बहुत अधिक निर्भर है. कर्नाटक अपने खर्च का 72 प्रतिशत राज्य के स्वयं के करों से पूरा करता है, जबकि बिहार को सिर्फ 23 फीसदी ही पूरा करना है. उनका 77 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है. भारत का राजस्व अपने सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की तुलना में असंगत रूप से जा रहा है.

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने से कौन रोक रहा? 

थरूर ने 2026 में परिसीमन पर अपनी राय रखते हुए कहा कि अगर इरादा नए लोकसभा हॉल को भरने का है, तो उत्तर प्रदेश में पूरे दक्षिण की तुलना में अधिक संख्या में सांसद हो सकते हैं. यदि हिंदी भाषी राज्यों के पास दो-तिहाई बहुमत है, तो उन्हें हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए संशोधन लाने से कौन रोकता है? यह आवश्यक है कि सभी लोग यह महसूस करें कि साझी राष्ट्रीयता उनके लिए पहले है.