स्पीकर के खिलाफ धरने पर बैठे हिमाचल के 3 निर्दलीय विधायक, इस्तीफे पर किया बड़ा खुलासा
Himachal Independent MLAs Protest: हिमाचल के तीनों निर्दलीय विधायकों ने विधानसभा परिसर में विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया है. विधायकों का आरोप है कि उनके इस्तीफों को स्वीकार इसलिए नहीं किया जा रहा है ताकि उन सीटों पर उपचुनाव नहीं कराया जाए.
Himachal Independent MLAs Protest: हिमाचल प्रदेश के तीनों निर्दलीय विधायक होशियार सिंह, आशीष शर्मा और केएल ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ विधानसभा परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया. तीनों निर्दलीय विधायकों की मांग है कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया उनके इस्तीफे को स्वीकार करें.
हिमाचल के तीनों निर्दलीय विधायकों ने 22 मार्च को इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था. विधायकों का आरोप है कि उनकी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव न हो इसलिए उनके इस्तीफे को विधानसभा अध्यक्ष स्वीकार नहीं कर रहे है.
अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया- होशियार सिंह
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक विधायक होशियार सिंह ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से अपना इस्तीफा दिया है लेकिन विधानसभा अध्यक्ष इसे स्वीकार करने में देरी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमें नोटिस भेजकर इस बात की जानकारी मांगी गई है कि क्या हमने किसी के दबाव में इस्तीफा दिया है? हम पिछले महीने कहां रहे, आदि.
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होशियार सिंह ने आगे कहा कि हर कोई जानता है कि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार कभी भी समय गिर सकती है. उन्होंने आगे कहा कि अगर हमारे इस्तीफे स्वीकार नहीं किए गए, तो हम कोर्ट का रुख करेंगे.
22 मार्च को विधायकों ने दिया था इस्तीफा
आपको बताते चलें, हिमाचल विधानसभा के तीन निर्दलीय विधायक होशियार सिंह, आशीष शर्मा और केएल ठाकुर ने हिमाचल की राज्यसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी के खिलाफ मतदान किया था. इसके बाद इन तीनों विधायकों ने 22 मार्च को हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की उपस्थिति में अपना इस्तीफा सौंप दिया था.
राज्यपाल ने भी विधानसभा अध्यक्ष से की थी अपील
हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल की ओर से भी इन तीनों विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से अपील की गई थी. राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट के कर्नाटक और मध्य प्रदेश से संबंधित उस फैसले की प्रति भी भेजी जिसमें अदालत ने कहा था कि अगर कोई विधायक विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा देता है तो उसे तुरंत स्वीकार किया जाना चाहिए.