Gujarat News: Bachpan Ki Tasveer! दादी नहला रही थी, Google ने Mail कर दिया ब्लॉक
Gujarat News: टेक कंपनी गूगल ने एक शख्स के ईमेल को सिर्फ इसलिए बंद कर दिया, क्योंकि उसने अपनी दादी के साथ खुद की बचपन की तस्वीर Google Drive पर अपलोड की थी. शख्स ने इस जानकारी के बाद कोर्ट से गूगल की शिकायत की, जिसके बाद कोर्ट ने गूगल को नोटिस जारी किया.
Gujarat News: गुजरात के एक शख्स ने Google Drive पर एक फोटो अपलोड की. फोटो काफी पुरानी थी, जिसमें शख्स की दादी उन्हें बचपन में नहलाते हुए दिख रही थीं. इस फोटो को अपलोड किए जाने के बाद गूगल ने शख्स के ईमेल को ब्लॉक कर दिया. जब इसकी जानकारी शख्स को हुई, तो वो गूगल के खिलाफ कोर्ट पहुंच गया. इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट ने गूगल को नोटिस जारी कर दिया.
गूगल के खिलाफ शिकायत करने वाले शख्स का नाम नील शुक्ला है, जो पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर हैं. उन्होंने बताया कि गूगल ड्राइव पर 'बचपन की तस्वीर' अपलोड करने के कारण उसके ईमेल अकाउंट को एक साल तक ब्लॉक रखा गया. इसलिए उन्हें गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा.
याचिकाकर्ता नील शुक्ला की शिकायत पर हाई कोर्ट ने ईमेल अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए Google इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया है. जस्टिस वैभवी डी नानावटी की कोर्ट ने 15 मार्च को गूगल, केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया, जिसका जवाब 26 मार्च तक देना होगा.
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कंप्यूटर इंजीनियर के ईमेल अकाउंट को क्यों किया बैन?
नील शुक्ला के वकील दीपेन देसाई ने बताया कि टेक कंपनी गूगल ने बाल शोषण यानी Explicit Child Abuse का हवाला देते हुए उनके ईमेल अकाउंट को बंद कर दिया था. याचिकाकर्ता नील शुक्ला ने Google ड्राइव पर बचपन की तस्वीरें अपलोड कीं. तस्वीर उस वक्त की थी, जब नील शुक्ला दो साल के थे. फोटो में उनकी दादी, उनके कपड़े उतारकर उन्हें नहलाती दिख रही थीं.
दीपेन देसाई ने अदालत को बताया कि टेक दिग्गज ने अपनी नीति का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए अप्रैल 2023 में नील शुक्ला का अकाउंट ब्लॉक कर दिया था. उन्होंने कहा कि नील शुक्ला का अधिकतर काम ईमेल के जरिए होता है. उन्होंने अपने ईमेल अकाउंट को बहाल कराने की कोशिश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनकी ओर से याचिका में ये भी कहा गया कि उनके ईमेल अकाउंट के बंद होने से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा है.
शुक्ला ने भारत में ऐसे मामलों के लिए नोडल एजेंसी, गुजरात पुलिस और केंद्र के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट से भी कॉन्टैक्ट किया था, लेकिन वे भी कार्रवाई करने में विफल रहे और आखिरकार नील शुक्ला को कानूनी उपाय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा.