Electoral Bonds: चुनाव आयोग को मिला चुनावी बॉन्ड का डेटा, जल्द खुलेगी चंदे की पोल
Electoral bonds: भारतीय स्टेट बैंक ने सोमवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट के एक सख्त आदेश के बाद भारत के चुनाव आयोग को चुनावी बांड का डेटा भेज दिया है.
Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सख्त आदेश के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मंगलवार शाम को भारत के चुनाव आयोग (Election commission) को चुनावी बांड (Electoral Bonds) का डेटा भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि डेटा शाम 5 बजे तक पोल पैनल को भेजा जाए. हालांकि बैंक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ने अभी तक कोर्ट के आदेश के अनुपालन की पुष्टि करने वाला हलफनामा दायर नहीं किया है.
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि हलफनामा तैयार है लेकिन अभी तक कोर्ट में जमा नहीं किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इस डेटा को जारी करने की समय सीमा 6 मार्च बढ़ाने की मांग की गई थी. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने आदेशों की जानबूझकर अवज्ञा के लिए बैंक को फटकार लगाई थी. साथ ही अवमानना कार्यवाही की चेतावनी दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती के साथ की थी ये टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम इस समय अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग नहीं कर रहे हैं. हम एसबीआई को नोटिस देते हैं कि यदि कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो यह जानबूझकर अवज्ञा का मामला होगा. इसके बाद हम कार्यवाही करेंगे.
बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में दिया था ये तर्क
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बैंक ने तर्क दिया था कि डेटा को इकट्ठा करने, क्रॉस-चेक करने और जारी करने में काफी समय लगेगा. इसे दोनों पक्षों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए दो साइलो में रखा गया है. बैंक ने कहा कि हमें अनुपालन के लिए थोड़ा और समय चाहिए. हमें बताया गया कि यह गोपनीय जानकारी है.
सुप्रीम कोर्ट ने बैंक को क्या कहा था?
इसको लेकर बैंक ने 30 जून तक का समय मांगा था. बैंक की ओर से मांगी गई समय सीमा 2024 के आम चुनाव से कुछ ही समय पहले थी. इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दानदाता का डेटा एसबीआई की मुंबई शाखा में था और बैंक को केवल कवर खोलना, डेटा एकत्र करना और जानकारी देना था.
पिछले महीने एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक ठहराया था. कहा था कि यह नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है. एसबीआई को 6 मार्च तक डेटा जुटाने और पोल पैनल को 13 मार्च तक भेजना का निर्देश दिया था.