menu-icon
India Daily
share--v1

Supreme Court strikes down electoral bonds scheme: एक-एक बांड की देनी होगी जानकारी, ये असंवैधानिक, चुनावी बांड पर SC की रोक

Supreme Court strikes down electoral bonds scheme: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. इस दौरान SC ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड RTI का उल्लंघन है. मतदान के अधिकार के लिए जानकारी जरूरी है.

auth-image
India Daily Live
Electoral Bond

Supreme Court strikes down electoral bonds scheme: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. इस दौरान SC ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड RTI का उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि काले धन पर अंकुश लगाने के लिए सूचना के अधिकार का उल्लंघन उचित नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड स्कीम असंवैधानिक करार देते हुए तत्काल प्रभाव से इस पर रोक लगाने का आदेश दिया है. SC ने केंद्र सरकार से चुनावी बॉन्ड स्कीम के जगह किसी अन्य विकल्प पर विचार करने को कहा है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने इस मामले पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया. 

सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से 6 मार्च तक चुनावी बॉन्ड की जानकारी देने के लिए कहा है. SBI सभी पार्टियों को मिले चंदे की जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग को देगी. चुनाव आयोग के पास 13 मार्च तक अपनी वेबसाइट पर जानकारी पब्लिश करने का समय तय किया गया है. फैसले की शुरुआत में सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि राय दो हैं, एक उनकी और दूसरी जस्टिस संजीव खन्ना की और दोनों एक ही निष्कर्ष पर पहुंचते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी बांड के माध्यम से कॉर्पोरेट योगदानकर्ताओं के बारे में जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए क्योंकि कंपनियों की ओर से दिये जाने वाले दान पूरी तरह से बदले के उद्देश्य से है. अदालत ने माना कि कंपनी अधिनियम में कंपनियों द्वारा राजनीतिक योगदान की अनुमति देने वाला संशोधन मनमाना और असंवैधानिक है. बड़े चंदे की गोपनीय बरकरार रखने को लेकरइनकम टैक्स एक्ट में 2017 में किया गया बदलाव असंवैधानिक है. 

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक

याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में पक्ष रखने वाले सुप्रीम कोर्ट वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने फैसले पर खुशी का इजहार किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत करेगा. उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि इलेक्टोरल बॉन्ड के बारे में जानकारी देशवासियों का मौलिक अधिकार है और यह लोगों के सूचना के अधिकार के खिलाफ था. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब चुनावी बॉन्ड से संबंधित हर डिटेल्स वेबसाइट पर डालकर सार्वजनिक करनी होगी. 

पब्लिक डोमेन में आएगा पॉलिटिकल फंडिंग 

चुनावी बॉन्ड योजना पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का SC के वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़  ने साफ शब्दों में कहा कि पॉलिटिकल पार्टी की फंडिंग की जानकारी पब्लिक डोमेन में ना आना मोटिव के मोटिव के साथ विपरीत है. 

 

चुनावी बांड योजना से काले धन पर रोक

इस मामले में पिछले साल 31 अक्तूबर से सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने नियमित सुनवाई शुरू की थी. मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पिछले साल 2 नवंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बीते दिनों सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट में अपनी दलीलों को रखते हुए कहा था कि चुनावी बांड योजना से फंडिंग में पूरी तरह से पारदर्शीता आएगा और काले धन पर रोक लगेगी. बीते दिनों सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पार्टियों को मिली फंडिंग का डेटा नहीं रखने पर चुनाव आयोग से नाराजगी जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से बेचे गए चुनावी बॉन्ड के संबंध में 30 सितंबर, 2023 तक डेटा जमा करने को कहा था. 

जानें क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड?

देश में साल 2018 में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को कानूनी रूप से लागू किया गया था. इस योजना को लागू करने के पीछे सरकार ने यह तर्क दिया था कि इससे राजनीतिक दलों को होने वाली फंडिंग में ट्रांसपरेंसी आएगी और बेहिसाब नकदी काला धन के इस्तेमाल पर रोक लगेगा. ये बॉन्ड 1000, 10 हजार, 1 लाख और 1 करोड़ रुपये तक के हो सकते हैं. देश का कोई भी नागरिक या कंपनी किसी भी राजनीतिक पार्टी को चंदा देना चाहते हैं तो उसे बॉन्ड खरीदना होगा. चुनावी बॉन्ड में डोनर का नाम नहीं होता. इस बॉन्ड को खरीदकर आप जिस पार्टी को चंदा देना चाहते हैं इस पर उसका नाम लिखते हैं. इस बॉन्ड को आप बैंक को वापस कर सकते हैं और अपना पैसा वापस ले सकते हैं, लेकिन एक तय समय सीमा के अंदर आपको यह सब औपचारिकताएं करनी पड़ेगी.

जानें इलेक्टोरल बॉन्ड प्राप्त करने की अनिर्वाय शर्त?

प्रावधानों के अनुसार केवल वे राजनीतिक दल जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत हैं और जिन्हें पिछले लोकसभा या राज्य विधान सभा चुनावों में डाले गए वोटों का कम से कम 1 प्रतिशत वोट मिले हों. वह चुनावी बांड प्राप्त करने के लिए पात्र हैं. पॉलिटिकल फंडिंग में पारदर्शिता लाने के मद्देनजर राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद दान के विकल्प के रूप में इलेक्टोरल बॉन्ड को लाया गया.