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NCP विधायक रोहित पवार से ED की आठ घंटे पूछताछ, फिर किये गए तलब

NCP अध्यक्ष शरद पवार के पोते और विधायक रोहित पवार से ईडी ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बृहस्पतिवार को आठ घंटे लंबी पूछताछ की है. रोहित पवार से ED ने एक सप्ताह में दूसरी बार पूछताछ की है.

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Avinash Kumar Singh
 Rohit Pawar

हाइलाइट्स

  • NCP विधायक रोहित पवार से ED ने की आठ घंटे पूछताछ
  • दस्तावेज जमा करने के लिए 8 फरवरी को फिर बुलाया

नई दिल्ली: NCP अध्यक्ष शरद पवार के पोते और विधायक रोहित पवार से ईडी ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बृहस्पतिवार को आठ घंटे लंबी पूछताछ की है. रोहित पवार से ED ने एक सप्ताह में दूसरी बार पूछताछ की है. इससे पहले उनसे 24 जनवरी को पूछताछ की गई थी. ED ने आगे की पूछताछ के लिए  रोहित पवार को 8 फरवरी तक मामले से जुड़ी कुछ जानकारियां मांगी है. 

'पूछताछ के पीछे राजनीतिक मकसद'

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED के सामने पेश होने के बाद NCP नेता रोहित पवार ने पूछताछ के पीछे राजनीतिक मकसद का बड़ा दावा किया. उन्होंने विपक्षी नेताओं को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाया. रोहित पवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा "चुनाव नजदीक है, इसलिए विपक्षी नेताओं के खिलाफ ये कार्यवाही और जांच हो रही है. ईडी ने 8 फरवरी को कुछ जानकारी मांगी है. अधिकारियों ने मुझे 8 फरवरी को फिर से आने और बाकी दस्तावेज जमा करने के लिए कहा. मैं जांच अधिकारी का समर्थन करता हूं और आज दस्तावेज जमा किए और सभी ने मेरा समर्थन किया.12 या 13 फरवरी को मुझे बुलाया जा सकता है. 

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोहित पवार तलब 

मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत पूछताछ के लिए ईडी ने रोहित पवार को गुरुवार को तलब किया था. यह जांच महाराष्ट्र राज्य सहकारी (एमएससी) बैंक घोटाला मामले के संबंध में है, जो 25,000 करोड़ रुपये के ऋण के कथित धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है. वहीं पार्टी के समर्थकों ने केंद्रीय एजेंसी की ओर से की जा रही गई जांच को लेकर मुंबई में एनसीपी मुख्यालय के बाहर भूख हड़ताल प्रदर्शन शुरू किया. इससे पहले 24 जनवरी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोहित पवार से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की थी और 1 फरवरी को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया था.

जानें क्या हैं एमएससी बैंक घोटाला? 

25,000 करोड़ रुपये के एमएससी बैंक घोटाले के बाद चार लोगों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. यह जनहित याचिका धोखाधड़ी के मामलों से जुड़ा हुआ था. याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ चीनी मिलों ने कुछ चीनी मिलों ने कर्ज नहीं चुकाया. जो उन्हें बिना जांच पड़ताल के दिए गए थे. उन चीनी मिलों को एमएससी बैंकों की ओर से कुर्क कर लिया गया और बैंक के विभिन्न पदाधिकारियों और राजनेताओं को नीलाम कर दिया गया. जनहित याचिका पर कार्रवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामला दर्ज करने का आदेश दिया. महाराष्ट्र सरकार के अधीन आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मामले की जांच की. जब ईओडब्ल्यू ने 2020 में बॉम्बे सेशन कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दायर की, तो ईडी ने क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ याचिका दायर की और जांच शुरू कर दी गई.