Devendra Fadnavis on Uddhav Thackeray : जहां महाराष्ट्र में सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पा रही है और एनडीए के दिग्गज नेता सबको साथ लेकर चलने का फॉर्मूला तैयार करने में जुटे हैं तो वहीं पर बीजेपी की ओर से जारी की गई उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नाम न होने पर सियासत रुकने का नाम नहीं ले रही है.
लोकसभा चुनाव के लिए 195 उम्मीदवारों की पहली सूची में नितिन गडकरी का नाम न होने को लेकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक दिन पहले ही तंज कसा था और कहा था कि पार्टी के सबसे वफादार और दिग्गज नेता का नाम लिस्ट में न होना आश्चर्यजनक है.
इतना ही नहीं उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को रैली को संबोधित करते हुए ये भी कहा था कि गडकरी को "महाराष्ट्र की ताकत" दिखानी चाहिए और "दिल्ली के सामने झुकने" के बजाय इस्तीफा देना चाहिए. अगर वो ऐसा करते हैं तो हम उन्हें एमवीए (महाविकास अघाड़ी) उम्मीदवार के रूप में उनका चुनाव सुनिश्चित करेंगे.
अब इसी को लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि यह उनकी छोटी सोच को दर्शाता है. शुक्रवार को उन्होंने महाराष्ट्र के सीट शेयरिंग पर बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन जब फॉर्मूला तय करने बैठेगा तो लिस्ट फाइनल करने में सबसे पहला नाम केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का ही होगा जो कि बीजेपी उम्मीदवारों में सबसे ऊपर रहेंगे.
उद्धव पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने कहा,'गडकरी हमारे प्रमुख नेता हैं, वह नागपुर से चुनाव लड़ते हैं. जब (बीजेपी की) उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की गई थी, तो महायुति सहयोगियों (भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी) के बीच कोई चर्चा नहीं हुई थी ... जब चर्चा होगी, तो (उम्मीदवारों की सूची में) गडकरी का नाम सबसे पहले आएगा. ऐसी पार्टी (शिवसेना-यूबीटी) के प्रमुख का गडकरी जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता को प्रस्ताव देना वैसा ही है जैसे कोई छोटा व्यक्ति किसी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद की पेशकश कर रहा हो.'
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने कहा था कि गडकरी एक राष्ट्रीय नेता हैं जो असली भाजपा का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस दौरान उन्होंने पार्टी की सोच को लेकर भी सवाल खड़े किए और जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी एमवीए में गडकरी का स्वागत करेगी तो उन्होंने उसका भी जवाब दिया.
उन्होंने कहा, 'मैं समझ नहीं पा रही हूं कि अब पार्टी को क्या हो गया है. हमने संसद में बोलना सुषमाजी (स्वराज) और अरुणजी (जेटली) से सीखा है. वह ऐसे व्यक्ति हैं जो विपक्षी नेताओं को अपना दुश्मन नहीं मानते हैं. वह लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, और इसलिए उनके लिए हमेशा सम्मान रहेगा.'