नई दिल्ली: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां जोरों पर है. इसी बीच इस समारोह को लेकर सियासत भी तेज हो चली है. सपा प्रवक्ता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर निशाना साधते हुए उन पर संतों-महंतों और शंकराचार्य के अपमान का गंभीर आरोप लगाया है.
प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए पवन पांडे ने कहा "चंपत राय अहंकारी हैं. विपक्ष का कौन सा नेता इनके आगे या उनके पैरों में गिड़गिड़ा रहा था कि हमें रामलला प्राण प्रतिष्ठा निमंत्रण दें. क्या राम मंदिर या अयोध्या के किसी भी मंदिर में जाने के लिए चंपत राय जी से टिकट लेना पड़ेगा. क्या वो मंदिर में प्रवेश के लिए अब टिकट देंगे. क्या 22 जनवरी को ही प्रभु श्रीराम राम मंदिर में मिलेंगे. उसके बाद रामलला का दर्शन लाभ नहीं मिलेगा. प्राण प्रतिष्ठा के बाद क्या एक आम आदमी प्रभु रामलला के दर्शन नहीं कर सकता. चंपत राय अपना सर्टिफिकेट को अपने जेब में ही रखें."
पवन पांडे ने अपने बयान में आगे कहा "चंपत राय को इतना अहंकार हो गया है वो पूज्य शंकराचार्य के संतों के उनके आदर्श से उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहे है. उनके सम्मान के खिलाफ बोल रहे है और उन्हें अपमानित किया जा रहा है. सुनने में आ रहा है कि शंकराचार्य जनों ने मना कर दिया है. अगर प्रधानमंत्री का प्रोटोकॉल है तो हमारे शंकराचार्य और पूज्य संतों महंतों का भी प्रोटोकॉल है उसका पूरा पालन किया जाना चाहिए."
22 जनवरी को दिवाली मनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के जवाब में मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव ने करारा तंज सकते हुए कहा कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं को घर-घर और सभी गांवों में घी बांटना चाहिए ताकि लोग श्री राम का दीप जला सकें. मुझे जानकारी मिली है कि घर-घर दीपक जलाने का संदेश आया है और बीजेपी के लोग गांव-गांव जाएंगे. मैं बीजेपी से आग्रह करूंगा कि घर-घर, गांव-गांव घी पहुंचाएं ताकि रामभक्त अपने घरों में घी का दीपक जला सकें.
बीते दिनों रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने के सवाल पर अखिलेश यादव ने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि हमारी परंपरा और पूर्वज कहते हैं कि जब भगवान बुलाते हैं तो सब जाते हैं और कब किसको भागवान बुला लें ये किसको पता है? BJP के पास धार्मिक ध्रुवीकरण का सहारा बचा हुआ है. इसके आलावा कुछ भी नहीं है, ये धर्म का इस्तेमाल राजनीति में पहले दिन से करते आए हैं. जनता को धोखा देना एक तरह से इनका व्यवहार समझ लें, धंधा समझ लें. इनका कार्यक्रम समझ लें या इनकी रणनीति समझ लें. धर्म से राजनीति करने का तरीका इनकी रणनीति का हिस्सा है.