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India Daily
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'जातीय जनगणना कराने के बाद केंद्र सरकार की नींद खुली..', कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिलने पर लालू का बड़ा हमला

 बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने के सरकार के फैसले के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है.

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Avinash Kumar Singh
Lalu Prasad Yadav

हाइलाइट्स

  • कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिलने पर लालू का केंद्र पर हमला
  • 'जातीय जनगणना कराने के बाद केंद्र सरकार की नींद खुली'

नई दिल्ली: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने के सरकार के फैसले के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. लालू प्रसाद यादव ने बड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार सरकार की ओर से जातीय जनगणना कराने के बाद केंद्र सरकार की नींद खुली और उसने बहुजनों के हित पर ध्यान केंद्रित किया.

'जातीय जनगणना कराने के बाद केंद्र सरकार की नींद खुली'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट पर लिखा "मेरे राजनीतिक और वैचारिक गुरु कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न अब से बहुत पहले मिलना चाहिए था. हमने सदन से लेकर सड़क तक ये आवाज उठायी लेकिन केंद्र सरकार तब जागी जब सामाजिक सरोकार की मौजूदा बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना करवाई और आरक्षण का दायरा बहुजन हितार्थ बढ़ाया. डर ही सही राजनीति को दलित बहुजन सरोकार पर आना ही होगा."

'भारत रत्न दिया जाना हार्दिक प्रसन्नता का विषय'

इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कर्पूरी ठाकुर को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न देने के लिए केंद्र सरकार  की सराहना की. एक्स पोस्ट पर सीएम नीतीश ने लिखा "पूर्व मुख्यमंत्री और महान समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर जी को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया जाना हार्दिक प्रसन्नता का विषय है. केंद्र सरकार का यह अच्छा निर्णय है. कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी 100वीं जयंती पर दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान दलितों, वंचितों और उपेक्षित तबकों के बीच सकारात्मक भाव पैदा करेगा. हम हमेशा से ही कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न देने की मांग करते रहे हैं. वर्षों की पुरानी मांग आज पूरी हुई है. इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद."

जानें कौन है कर्पूरी ठाकुर? 

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को हुआ था और उनका निधन 17 फरवरी 1988 को हुआ था. ठाकुर का जन्म 1924 में समाज के सबसे पिछड़े वर्गों में से एक नाई समाज में हुआ था. जिनकी राजनीतिक यात्रा समाज के हाशिए पर मौजूद वर्गों के उत्थान से जुड़ा रहा. उन्होंने बिहार के दो बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ संघर्ष में एक प्रमुख व्यक्ति थे. सकारात्मक कार्रवाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने देश के गरीब, पीड़ित, शोषित और वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व और अवसर दिये. कर्पूरी ठाकुर को लोग प्यार से जननायक कहकर पुकारते थे.