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4,797 करोड़ की 'पृथ्वी योजना' से आपको क्या और कितना होगा फायदा! मोदी सरकार की आखिर क्या है प्लानिंग?

इस योजना का उद्देश्य पृथ्वी के महत्वपूर्ण संकेतों के बारे में जानकारी को बढ़ाना और वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक सेवाओं में बदलना है. इससे समाज, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को लाभ होता है.

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Naresh Chaudhary
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हाइलाइट्स

  • प्राकृतिक आपदाओं के लिए पहले से अलर्ट जारी करता है मंत्रालय
  • पीएम मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी है इस वजट का मंजूरी

Prithvi Vigyan Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक व्यापक पहल पृथ्वी विज्ञान (पृथ्वी) योजना को मंजूरी दी है. बताया गया है कि साल 2021 से 2026 के लिए निर्धारित 4,797 करोड़ रुपये के निवेश के साथ यह योजना पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान और अनुप्रयोग के लिए भारत के दृष्टिकोण में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है.

जानकारी के मुताबिक, पृथ्वी योजना पांच मौजूदा उप-योजनाओं (वायुमंडल, जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग अवलोकन प्रणाली और सेवाएं (ACROSS), महासागर सेवाएं, मॉडलिंग अनुप्रयोग, संसाधन और प्रौद्योगिकी (O-SMART), ध्रुवीय विज्ञान और क्रायोस्फीयर अनुसंधान (PACER), भूकंप विज्ञान और भूविज्ञान (SAGE) और अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच (REACHOUT) के केंद्र में काम करती है.

इन कार्यक्रमों का सामूहिक उद्देश्य पृथ्वी के महत्वपूर्ण संकेतों के बारे में जानकारी को बढ़ाना और वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक सेवाओं में बदलना है, जिससे समाज, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को ज्यादा से ज्यादा लाभ हो.

पृथ्वी योजना क्या करेगी?

पृथ्वी योजना के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक वायुमंडल, महासागर, भू-मंडल, क्रायोस्फीयर और ठोस पृथ्वी पर दीर्घकालिक नतीजों को बढ़ाना और बनाए रखना है. यह पृथ्वी की प्रणाली के महत्वपूर्ण संकेतों और परिवर्तनों की रिकॉर्डिंग व निगरानी करने में सक्षम होगा. इसके अलावा यह योजना मौसम, महासागर और जलवायु खतरों के लिए पूर्वानुमानित मॉडल विकसित करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन विज्ञान की समझ को आगे बढ़ाने पर भी केंद्रित है.

ध्रुवीय क्षेत्रों और ऊंचे समुद्री इलाकों की खोज एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू है, जिसका उद्देश्य नई घटनाओं और संसाधनों की खोज करना है. यह योजना सामाजिक उपयोगों के लिए समुद्री संसाधनों की खोज और टिकाऊ दोहन के लिए प्रौद्योगिकी के विकास पर भी जोर देती है.

प्राकृतिक आपदाओं के लिए पहले से अलर्ट जारी करता है मंत्रालय

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) मौसम, जलवायु, महासागर, तटीय राज्यों में जल विज्ञान, भूकंप विज्ञान और प्राकृतिक खतरों से संबंधित महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है. ये सेवाएं चक्रवात, बाढ़, सुनामी और भूकंप जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के लिए पूर्वानुमान, चेतावनियां और अलर्ट जारी करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे आपदा के लिए तैयारियों और जोखिम को कम करने में मदद मिलती है.