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अविश्वास प्रस्ताव एक मात्र विकल्प, राघव चड्ढा बोले- सरकार को मणिपुर पर चर्चा के लिए मजबूर करना मकसद

Raghav Chadha: आप नेता राघव चड्ढा ने केन्द्र सरकार से सवाल करते हुए निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट कर बताया कि अविश्वास प्रस्ताव सरकार को बातचीत करने के लिए मजबूर करेगा.

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Gyanendra Tiwari
अविश्वास प्रस्ताव एक मात्र विकल्प, राघव चड्ढा बोले- सरकार को मणिपुर पर चर्चा के लिए मजबूर करना मकसद

नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक बार फिर से संसद के दोनों सदनों में जारी हंगामे के बीच बीजेपी नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है. आज लोकसभा में विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा. अविश्वास प्रस्ताव को लेकर उन्होंने कई बाते कहीं हैं. उनका कहना है कि इससे सरकार सदन में जवाब देने के लिए मजबूर होगी. अविश्वास प्रस्ताव ही सरकार को जवाब देने के लिए और मणिपर पर चर्चा करने के लिए मजबूर करने के लिए एक मात्र विकल्प है.

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मणिपुर जल रहा है. ऐसी चिंताएँ बढ़ रही हैं कि अस्थिरता संभावित रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र के अन्य राज्यों में भी फैल सकती है. स्थिति के जवाब में, विपक्ष का गठबंझन INDIA आज लोकसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है.

उन्होंने आगे लिखा- भाजपा नहीं चाहती कि संसद चले, लेकिन 'INDIA' चाहता है. अविश्वास प्रस्ताव भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को जवाबदेही से बचने से रोकेगा और संसद को चलने देने के लिए मजबूर करेगा. 

अविश्वास प्रस्ताव सरकार को जवाबदेह ठहराने और राष्ट्र को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मामलों को संबोधित करने के लिए प्रेरित करने के लिए एक वैध संसदीय तंत्र है. इसका उपयोग करके, INDIA स्थिति की तात्कालिकता पर जोर देना चाहता है और सत्तारूढ़ सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है.

मंत्रलाय ने प्रश्नों का नहीं दिया जवाब
राघव चड्ढा ने एक और ट्वीट करके बताया कि उन्होंने मणिपुर हिंसा को लेकर गृह मंत्रालय से जवाब मांगा थे. लेकिन मंत्रालयन ने उनके प्रश्नों को खारजि कर दिया.

उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि "मैंने मणिपुर हिंसा पर गृह मंत्रालय से जवाब मांगने के लिए एक प्रश्न पत्र दायर किया था. मेरे प्रश्न को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि यह मुख्य रूप से भारत सरकार की चिंता का विषय नहीं है और यह एक ऐसे मामले पर है जो कानून की अदालत के फैसले के अधीन है. इससे BJP का असली चेहरा उजागर हो गया है. क्या मणिपुर केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?"

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