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यूपी के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के 77% पद खाली, 516 स्कूलों में एक भी टीचर नहीं, RTI में खुलासा

UP Primary Schools: आरटीआई के अनुसार कक्षा 1-5 तक 30 बच्चों पर एक और कक्षा 6-8 तक 35 बच्चों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है, लेकिन नगर क्षेत्र के स्कूलों में साल 2011 के बाद से शिक्षकों की भर्ती न होने के कारण लगभग एक चौथाई पद खाली पड़े हैं.

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Sagar Bhardwaj
यूपी के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के 77% पद खाली, 516 स्कूलों में एक भी टीचर नहीं, RTI में खुलासा

नई दिल्ली: परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय ट्रांसफर तो हो गए लेकिन ग्रामीण से नगर क्षेत्र में ट्रांसफर का इंतजार 12 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है. बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र में संचालित प्रदेशभर के 3906 प्राथमिक स्कूलों में 8 महीने पहले कार्यरत शिक्षकों की संख्या 3390 थी.

प्रदेश के 516 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं

 यदि प्रत्येक स्कूल में एक शिक्षक भी कम मान लें तो प्रदेश के 516 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है. इसी प्रकार नगर क्षेत्र के 1198 उच्च प्राथमिक स्कूलों में टीचरों के 40% पद खाली पड़े हुए हैं.

बता दें कि ये हालात 8 महीने पहले के हैं, वर्तमान हालात और ज्यादा बदतर हो चुके हैं. पिछले ढाई साल से बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी ग्रामीण से नगर क्षेत्र में शिक्षकों के तबादले को लेकर सिर्फ मंथन ही कर रहे हैं. 

महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने शिक्षकों के ग्रामीण से नगर क्षेत्र में ट्रांसफर के लिए 24 दिसंबर  2020 को शासन को प्रस्ताव भेजा था. इसके बाद भी दो बार शासन को प्रस्ताव भेजा गया लेकिन कुछ नहीं हुआ.

ट्रांसफर का आदेश जारी मगर लिस्ट का कुछ पता नहीं
वहीं प्रदेशभर के सहायता प्राप्त माध्यमकि स्कूलों में कार्यरत 1193 टीचरों व प्रिंसिपलों का ट्रांसफर ऑर्डर जारी होने के तीन दिन बाद भी लिस्ट का कोई अता-पता नहीं है. ट्रांसफर किए गए शिक्षकों की सूचि न तो विभाग की वेबसाइट पर डाली गई है और न ही शिक्षा निदेशाल में लगाई गई है, ऐसे में पता ही नहीं चल रहा है कि किस शिक्षक का ट्रांसफर हुआ है और किसका नहीं.

आखिरी बार 2011 में हुआ था नगरी क्षेत्र में ट्रांसफर
शिक्षकों के नगरी क्षेत्रों में ट्रांसफर आखिरी बार 2011 में हुए थे. उसके बाद से यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी है. आरटीआई के अनुसार कक्षा 1-5 तक 30 बच्चों पर एक और कक्षा 6-8 तक 35 बच्चों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है, लेकिन नगर क्षेत्र के स्कूलों में साल 2011 के बाद से शिक्षकों की भर्ती न होने के कारण लगभग एक चौथाई पद खाली पड़े हैं.

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