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पीलीभीत में मुस्लिम और कुर्मी वोटर तय करते हैं प्रत्याशी की किस्मत; अबकी बार बीजेपी का कैंडिडेट बदलने से कितने बदले समीकरण

Lok Sabha Elections 2024: उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट पर अबकी बार बीजेपी ने वरुण गांधी की टिकट काटकर योगी सरकार के मंत्री जितिन प्रसाद को टिकट दिया है. आज पीएम मोदी पीलीभीत में एक रोड शो करेंगे और बीजेपी प्रत्याशी के लिए वोट मांगेंगे. आपको इस सीट के समीकरण और इतिहास के बारे में बताते हैं.

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Pankaj Soni

Lok Sabha Elections 2024 : उत्तर प्रदेश की चर्चित लोकसभा सीट पीलीभीत में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली करने जा रहे हैं. पीएम मोदी यहां बीजेपी प्रत्याशी जितिन प्रसाद के लिए वोट मांगेंगे. पीलीभीत मेनका गांधी-वरुण गांधी की परंपरागत सीट रही है. इस सीट से अबकी बार बीजेपी ने वरुण गांधी का टिकट काटकर जितिन प्रसाद को मैदान में उतारा है. उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट राजीव गांधी परिवार की पारंपरिक सीट मानी जाती है. साथ ही 30 साल से यह सीट बीजेपी का गढ़ बनी हुई है. मेनका गांधी यहां से 6 बार सांसद चुनी गई हैं. जबकि वरुण गांधी इस सीट से 2 बार सांसद बने हैं. पीलीभीत कभी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी  की गढ़ होती थी. 1996 से लेकर अब तक ये सीट मेनका गांधी फैमिली के पास है.

इस बार बीजेपी ने इस सीट पर योगी के मंत्री जितिन प्रसाद को टिकट दिया है. इसके लिए वरुण गांधी का टिकट काट दिया गया है. बीएसपी ने इस सीट पर पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां को उम्मीदवार बनाया है. वहीं सपा- कांग्रेस गठबंधन ने भगवत सरन गंगवार को यहां से उम्मीदवार बनाया है. 

पीलीभीत सीट का परिचय 

उत्तराखंड से लगी पीलीभीत लोकसभा सीट तहत 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इसमें बहेड़ी, पीलीभीत, बरखेरा, पूरनपुर और बीसलपुर शामिल हैं. इन पांच में से 4 सीटों पर बीजेपी और 1 सीट पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं. बहेड़ी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के अताउर रहमान विधायक चुने गए हैं. जबकि पीलीभीत से संजय गंगवार, बरखेरा से स्वामी प्रकटानंद, पूरनपुर से बाबूराम पासवान और बीसलपुर से विवेक वर्मा विधायक हैं.

पीलीभीत का जातिगत समीकरण

पीलीभीत लोकसभा सीट पर सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता हैं. इनकी संख्या करीब 4.30 लाख हैं. इसके अलावा इस सीट पर सवा दो लाख कुर्मी वोटर भी हैं. 4 लाख दलित वोटर हैं, जो हार-जीत का फैसला करने में अहम भूमिका निभाते हैं. पीलीभीत में 1.7 लाख ब्राह्मण और एक लाख सिख वोटर हैं. इसके अलावा इस सीट पर राजपूत और किसानों की भी अच्छी-खासी तादाद हैं.

पीलीभीत जिले में सदर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 60 से 70 हजार, बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र में 70 से 80 हजार, बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 30 हजार कुर्मी मतदाता हैं. पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र में नाम मात्र के कुर्मी हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में शामिल बरेली के बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 85 हजार कुर्मी मतदाता हैं. पूरे लोकसभा क्षेत्र में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं.

कुर्मी-मुस्लिम कार्ड का क्या होगा असर

वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में पीलीभीत लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी ने कुर्मी बिरादरी के दिग्गज नेता सत्यपाल गंगवार को चुनाव मैदान में उतारा था. तब 1,02,720 मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी से पराजित होकर सपा प्रत्याशी सत्यपाल गंगवार दूसरे नंबर पर रहे थे. तब भी बहुजन समाज पार्टी से मुस्लिम बिरादरी के अनीस अहमद खां चुनाव मैदान में थे. इस बार के लोकसभा चुनाव में भी पीलीभीत सीट से वही अनीस अहमद खां बसपा से फिर चुनाव मैदान में हैं. सपा से कुर्मी बिरादरी के भगवत सरन गंगवार चुनाव मैदान में आ रहे हैं. इस बार कुर्मी मुस्लिम कार्ड क्या रंग लाएगा, यह तो चार जून को परिणाम आने पर ही पता चलेगा.

पीलीभीत सीट का संसदीय इतिहास

पीलीभीत लोकसभा सीट के संसदीय इतिहास की बात करें तो यहां पर 1990 के बाद से बीजेपी का ज्यादातर कब्जा रहा है. 1952 के चुनाव में यहां से कांग्रेस ने जीत से शुरुआत की थी, लेकिन वह अब तक महज 4 बार ही चुनाव में जीत सकी है. इसके बाद प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर मोहन स्वरूप ने जीत की हैट्रिक लगाई. फिर वह कांग्रेस के टिकट पर 1971 का चुनाव लड़े और जीत हासिल की. 1977 में हुए चुनाव में पीलीभीत सीट पर खास परिणाम देखने को मिला था. इस चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर नवाब शमशुल हसन खान को जीत मिली थी. 1980 में हरीश कुमार गंगवार तो 1984 में कांग्रेस के भानुप्रताप सिंह सांसद बनने में कामयाब रहे थे.

लेकिन 1989 के चुनाव के बाद में पीलीभीत सीट का इतिहास बदल गया. 1989 में मेनका गांधी जनता दल के टिकट पर सांसद बनी थीं. 1991 में बीजेपी के परशुराम गंगवार सांसद बने और पार्टी का खाता खुला. फिर 1996 में जनता दल के टिकट पर मेनका गांधी फिर से सांसद चुनी गईं. 1998 और 1999 में वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनी गईं, बाद में वह बीजेपी में आ गईं और 2004 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतीं.

कौन हैं सपा प्रत्याशी भगवत शरण गंगवार?

पार्टी के उम्मीदवार भगवत शरण गंगवार सपा सरकार में लघु उद्योग और निर्यात प्रोत्साहन राज्य मंत्री रहे रह चुके हैं. वे नवाबगंज से पांच बार विधायक रहे हैं. 2003 में सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री भी रहे चुके हैं. गंगवार ने आखिरी चुनाव 2012 में जीता था. बाद में उनको 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. 1991 और 1993 के दो चुनाव उन्होंने बीजेपी के टिकट पर जीते हैं. बाद में वो सपा में आए और फिर 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन बार सपा के टिकट पर विधायक चुने गए.

कौन हैं बीजेपी उम्मीदवार जितिन प्रसाद?

पीलीभीत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे जतिन प्रसाद योगी सरकार में मौजूदा मंत्री हैं. जितिन प्रसाद की शुरुआती शिक्षा दून पब्लिक स्कूल से हुई है. इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बी कॉम और दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान से एमबीए किया. पिता जितेंद्र प्रसाद के निधन के बाद राजनीति में सक्रिय हुए जितिन प्रसाद गांधी परिवार विशेषकर राहुल गांधी व प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते रहे हैं. वह कांग्रेस के कोर ग्रुप जी-23 के सदस्य भी रहे.

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