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Pilibhit Lok Sabha Seat results 2024: वरुण गांधी की सीट पर जितिन प्रसाद ने जमा लिया कब्जा, पीछे छूट गई सपा

Pilibhit Lok Sabha Seat results 2024: पीलीभीत लोकसभा सीट से वरुण गांधी सांसद हैं. वरुण गांधी को भारतीय जनता पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया है. कांग्रेस से आए नेता जितिन प्रसाद चुनावी मैदान में हैं. देखने वाली बात यह है कि यहां से जनता भरोसा जताती है या कन्नी काटती है.

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Pilibhit Lok Sabha
Courtesy: IDL

उत्तर प्रदेश की हाई प्रोफाइल लोकसभा सीटों में से एक पीलीभीत पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के जितिन प्रसाद ने जीत हासिल कर ली है. जितिन प्रसाद ने सपा के भगवत सरन गंगवार को 1.64 लाख वोटों से हरा दिया है. जितिन प्रसाद को कुल 6,07,158 वोट मिले. वहीं, भगवत सरन गंगवार 4,42,223 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे. बसपा के अनीस अहमद खान को कुल 89697 वोट मिले.

पीलीभीत लोकसभा सीट, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबदबे वाली सीट रही है. इस सीट पर मेनका गांधी और वरुण गांधी का दबदबा रहा है. अब इसी सीट से पू्र्व कांग्रेसी नेता जितिन प्रसाद को बीजेपी ने टिकट दिया है. इस लोकसभा सीट से कुल 18 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. मुख्य लड़ाई बीजेपी के जितिन प्रसाद और समाजवादी पार्टी के भगवंत शरण गंगवार के बीच में है.  बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने इस सीट से अनीस अहमद खान (फूल बाबू) को टिकट दिया है.

पीलीभीत में क्या हैं चुनावी मुद्दे?

पीलीभीत में बाघ और मानव संघर्ष, बड़ा चुनावी मुद्दा है. मानव बस्तियों में बाघ और तेंदुओं की दखल, बाघ अभ्यारण्य होने की वजह से बढ़ गई है. यहां तेंदुए और बाघों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि मानव बस्तियों तक इनकी आमद हो गई है. विकास, बदहाल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी भी एक मुद्दा है. बेरोजगारी और महंगाई भी यहां चुनावी मुद्दा है. 

पीलीभीत के जातीय समीकरण?

पीलीभीत लोकसभा सीट पर बीजेपी की वजह से सारे जातीय समीकरण ध्वस्त नजर आते है. लोधी किसान यहां सबसे बड़े फैक्टर हैं. लोधी मतदाताओं की संख्या करीब 4 लाख है, कुर्मी वोटर 2 लाख हैं, मौर्य 70 हजार, पासी 70 हजार, जाटव वोटरों की संख्या करीब 65 हजार है. यहां सिख भी निर्णायक स्थिति में हैं, उनकीआबादी 45,000 है. ब्राह्मण और ठाकुरों की आबादी भी निर्णायक है. यहां की 25 फीसदी आबादी मुस्लिम है.

साल 2019 में कौन जीता था?

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी वरुण गांधी और सपा उम्मीदवार हेमराज वर्मा के बीच चुनावी लड़ाई थी. वरुण गांधी को 704,549 वोट पड़े थे. उन्हें कुल 59.38 प्रतिशत वोट मिला था. सपा उम्मीदवार हेमराज वर्मा को 4,48,922 वोट मिले. उन्हें कुल 37.83 प्रतिशत वोट हासिल हुआ. यहां यहां 9,973 वोट नोटा (NOTA) पर डाले गए थे.

लोकसभा सीट का इतिहास

पीलीभीत लोकसभा सीट बीजेपी के दबदबे वाली सीट रही है. साल 1952 के चुनाव में मुकुंद लाल अग्रवाल यहां पहली बार सासंद चुने गए थे. साल 1957, 62, 67 और 71 के चुनाव में मोहन स्वरूप चुने गए गए. वे प्रजा सोशलिसस्ट पार्टी और कांग्रेस से जुड़े थे. साल 1977 में यहां पहली बार जनता पार्टी से मोहम्मद समशुल हसन खान जीते. 1980 और 84 में भानु प्रताप सिंह को जीत मिली. 1989 में पहली बार मेनका गांधी यहां से जनता दल के टिकट पर चुनवा लड़ीं. 1991 में परशुराम गंगवार, 1996, 98, 99 और 2004 में इस सीट से लगातार मेनता गांधी जीतती रहीं. 2009 में वरुण गांधी, 2014 और 2019 में वरुण गांधी जीतते रहे. यह मेनका और वरुण गांधी के दबदबे वाली सीट बन गई है.