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'पलटुओं' के सहारे तीसरी बार मोदी सरकार, कैसे नीतीश-नायडू बने किंगमेकर, क्या बदलेंगे पाला?

संसद में दस साल तक एक ही पार्टी के बहुमत का आनंद लेने के बाद, इस बार भाजपा को कुछ गठबंधन सहयोगियों के समर्थन की आवश्यकता होगी. इस बार का जनादेश कुछ अलग है. नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री तो बन सकते हैं लेकिन अगर नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू चाहें तो उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ सकता है.

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देश ने अपना जनादेश दे दिया है. बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ है. बीजेपी अकेले दम पर पूर्ण बहुमत पाने से चुक गई. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर जीत मिली थी. इस बार केंद्र में सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों की भूमिका अहम होगी. पिछले साल INDIA ब्लॉक के गठन तक, भाजपा ने अपने कई सहयोगियों को खो दिया, जिनमें इसके सबसे पुराने सहयोगी, शिरोमणि अकाली दल (2020) और अविभाजित शिवसेना (2019) शामिल हैं.

18 जुलाई, 2023 को एनडीए ने एक बैठक की और घोषणा की कि इसमें 28 दल शामिल हैं. उस समय इंडियागठबंधन में 18 दल शामिल थे. इसके बाद के महीनों में, इसमें तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और टीआईपीआरए मोथा जैसे नए सदस्य शामिल हुए, लेकिन एआईएडीएमके जैसे कुछ सहयोगी चले गए. 

2024 के लोकसभा के चुनाव के नतीजों में एक बार फिर से एनडीए को सरकार बनाने का मौका मिला है. मतगणना के करीब 12 घंटे बाद, टीडीपी ने अकेले 16 सीटें जीत ली हैं, जबकि एनडीए ने आंध्र प्रदेश में 25 में से 21 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा है. बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू 12 सीटें जीतने जा रही है, जो बीजेपी के बराबर है, हालांकि वह अपने सहयोगी की तुलना में कम सीटों पर चुनाव लड़ी थी. 

इंडिया गठबंधन ने रोका मोदी का रथ

इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने मिलकर 233 सीटें जीतीं. बहुमत के आंकड़े से 39 कम है. भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 291 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है - भाजपा ने अपने दम पर 240 सीटें हासिल की हैं. ये जादुई आंकड़े से 33 कम है. अगर इंडिया ब्लॉक सत्ता में आना चाहता है, तो उसे जेडीयू, टीडीपी और कुछ निर्दलीयों के संयोजन की भी ज़रूरत होगी. दूसरी ओर, अगर भाजपा सत्ता में बनी रहना चाहती है, तो उसे हर कीमत पर उन्हें अपने साथ बनाए रखना होगा. 

फ्लिप-फ्लॉप मैन नीतीश कुमार

नीतीश कुमार कब क्या फैसला लेंगे किसी को पता नहीं होता.  विपक्षी गठबंधन को एक साथ लाने के प्रयासों का नेतृत्व करने के कुछ महीनों बाद नीतीश कुमार का एनडीए में शामिल हो गए. कई राजनीतिक जानकारों ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है. उनका पॉलिटक्ल डेथ है. सीट बंटवारे में JDU को  कम सीट मिली. कम सीटों पर लड़कर भी JDU  ने बीजेके बराबर सीटें जीतीं हैं. उनका फ्लिप-फ्लॉप का इतिहास रहा है. ऐसे में बीजेपी भले ही ये दावा कर रही हो कि नीतीश कुमार उनके साथ हैं, लेकिन नीतीश की चुप्पी पर कई बड़े सवालों को जन्म दे रहा है. 

कमबैक मैन चंद्रबाबू नायडू

2019 में तीन सीटें जीतने से लेकर इस साल 19 सीटें जीतने तक चंद्रबाबू नायडू ने शानदार वापसी की है. टीडीपी के कंधों पर सवार होकर, भाजपा ने भी एक ऐसे राज्य में तीन सीटें जीत हासिल की, जहां उसकी कोई मौजूदगी नहीं है. इसके अलावा, टीडीपी ने विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज की है. 1990 के दशक के गठबंधन युग के दौरान एचडी देवेगौड़ा और आईके गुजराल को मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले नायडू के राजनीतिक विभाजन के पार भी दोस्त हैं. जबकि उनके बेटे नारा लोकेश सहित टीडीपी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि वे एनडीए के साथ बने रहेंगे, अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख द्वारा लिया जाएगा.