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Kaiserganj Lok Sabha Results: कायम रहा दबदबा, बृजभूषण के बेटे करण भूषण सिंह ने कैसरगंज में मारी बाजी

Kaisharganj Lok Sabha Seats 2024 Election Results: कैसरगंज लोकसभा सीट से साल 2019 में बृजभूषण शरण सिंह चुनाव जीते थे. यह उनका गढ़ है. कहते हैं कि अगर वे निर्दलीय भी चुनाव लड़ जाते तो भी उनकी जीत तय थी. बीजेपी ने इस बार उन्हें टिकट न देकर, उनके बेटे करण भूषण पर भरोसा जताया.

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Kaisarganj Lok Sabha
Courtesy: IDL

उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दबदबा कायम है. बीजेपी ने इस बार बृजभूषण शरण सिंह के छोटे बेटे करण भूषण सिंह को चुनाव में उतारा था. अब करण भूषण ने समाजवादी पार्टी के भगत राम को 1,48,843 वोटों के अंतर से हरा दिया है. करण भूषण सिंह को कुल 5,71,263 वोट मिले हैं. वहीं, सपा के भगत राम को 4.22 लाख वोट मिले. बसपा के उम्मीदवार नरेंद्र पांडेय को सिर्फ 44279 वोट मिले. इस सीट पर NOTAको 14,887 वोट मिले. 

कैसरगंज के चुनावी मुद्दे?

कैसरगंज में बृजभूषण शरण सिंह के आने के बाद हर मुद्दे फीके पड़ गए. यहां भी विकास, रोजगार, व्यापार और अस्पताल चुनावी मुद्दा हैं. लोगों का कहना है कि जैसा विकास, होना चाहिए, वैसा विकास नहीं हुआ है. आवारा पशुओं को लेकर यहां की जनता परेशान है. इस सीट पर सांप्रदायिकता मुद्दा नहीं है. बृजभूषण की छवि बीजेपी में रहकर भी उग्र हिंदुत्व की नहीं बन पाई है.

कैसरगंज के जातीय समीकरण?

कैसरगंज में मिश्रित आबादी है लेकिन सवर्ण वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. यहां ब्राह्मण वोटर 20 फीसदी, ठाकुर 10 फीसदी, 18 फीसदी कुर्मी वोटर हैं. मुस्लिम आबादी 18 फीसदी है. यहां निषाद वोटर भी अहम भूमिका निभाते हैं. दिलचस्प बात ये है कि यहां हर वर्ग पर बृजभूषण शरण सिंह का दबदबा है.

2019 में कौन जीता था?

कैसरगंज 2019 से लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने बाजी मारी थी. इन्हें कुल 581,358 वोट मिले थे. उन्हें कुल 59.24 फीसदी वोट पड़े थे. दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी चन्द्रदेव राम यादव थे, जिन्हें कुल 3,19,757 वोट मिले थे. यह कुल वोट का 32.58 प्रतिशत है. नोटा को कुल 13,168 वोट पड़े थे. यह कुल मतों का 1.34 फीसदी है.

लोकसभा सीट का इतिहास

कैसरगंज लोकसभा सीट साल 1952 में अस्तित्व आई. इस साल हुए लोकसभा चुनावों में शकुंतला नायर को जीत मिली थी, वे हिंदू महासभा से थीं. 1957 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार भगवानदीन मिश्र, 1962 में बसंत कुमार, 1967 और 1971 में फिर शकुंतला नायर चुनी गईं.  वे जनसंघ से थीं. 1977 में रुद्र सेन चौधरी, 1980 और 1984 में राणा वीर सिंह, 1989 में रुद्रसेन चौधरी, 1991 में लक्ष्मीनारायण चौधरी चुनाव जीते. यह सपा के दिग्गज नेता बेनी प्रसाद वर्मा का गढ़ बन गया था. 1996, 98, 99, 2004 से लेकर 2009 तक लगातार वे जीतते रहे. साल 2014 में यहां से बृजभूषण शरण सिंह को टिकट मिला. वे बंपर वोटों से जीते. 2019 में भी उन्होंने जीत दर्ज की.