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कालाष्टमी आज,  जीवन की हर परेशानी से मुक्ति दिलाते हैं कालाष्टमी के ये उपाय

Kalashtami Upay 2024: हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान काल भैरव का पूजन बेहद ही फलदायी होता है. मान्यता है कि भगवान काल भैरव के पूजन से जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो जाता है. 

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Mohit Tiwari
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हाइलाइट्स

  • शत्रु बाधा से मिलती है मुक्ति
  • आर्थिक संकट होता है दूर

Kalashtami Upay 2024: हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है. इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भैरव बाबा भोलेनाथ के स्वरूप हैं. काल भैरव भोलेनाथ के रौद्र रूप हैं. माघ मास में भगवान भैरव की पूजा का महत्व नारद पुराण में बताया गया है. माना जाता है इस माह में काल भैरव की पूजा करने से नकारात्मक ताकतें और हर तरह के दोष खत्म हो जाते हैं. भैरव बाबा के भी तीन रूप काल भैरव, बटुक भैरव और रूद्र भैरव हैं. किसी भी प्रकार के डर, भय को दूर करने के लिए नियमित रूप से काल भैरव बाबा की पूजा करनी चाहिए. कालाष्टमी के दिन काला भैरव बाबा की पूजा करने से जातकों के जीवन से सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं और मनचाही मनोकामनाओं की भी पूर्ति होती है.  बाबा काल भैरव की पूजा करने से तंत्र और मंत्र की सिद्धि होती है. इसके लिए काल भैरव की पूजा निशिता मुहूर्त में की जाती है.

कालाष्टमी व्रत 2024 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार माघ मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 2 फरवरी को शाम 4 बजकर 2 मिनट पर होगी और इसकी समाप्ति अगले दिन यानी 3 फरवरी को शाम 5 बजकर 20 मिनट पर होगी. इसके चलते कालाष्टमी का व्रत 2 फरवरी को ही रखा जाएगा.

निशिता काल पूजा मुहूर्त

2 फरवरी को देर रात 12 बजकर 8 मिनट से रात के 1 बजकर 1 मिनट तक निशिता काल रहेगा. इस दौरान कालाष्टमी का पूजन किया जा सकता है.

 

नारद पुराण में बताया है महत्व

नारद पुराण में बताया गया है कि कालभैरव की पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. मनुष्य किसी रोग से लम्बे समय से पीड़ित है तो उसके रोग और दुख भी दूर होते हैं. इस दिन श्रद्धानुसार साबुत बिल्बपत्रों पर लाल या सफ़ेद चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं. बिल्बपत्र अर्पित करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करें. इस तरह पूजा करने से काल भैरव प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगे.

सरसों के तेल से करें पूजा 

इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में नहाकर व्रत करने का संकल्प लें. इसके बाद पितरों को याद करें और उनका श्राद्ध करें. इसक साथ ही ‘ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः’ का जाप करें. इसके उपरान्त काल भैरव की आराधना करें. अर्धरात्रि में धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करें. व्रत के सम्पूर्ण होने के बाद काले कुत्ते को मीठी रोटियां खिलाएं.

कालभैरव की पूजा से दूर होती हैं बीमारियां

यदि आप किसी असाध्य रोग से पीड़ित हैं तो कालाष्टमी पर आप काल भैरव की पूजा करने के बाद काल भैरव चालीसा का पाठ अवश्य करें और पाठ करने के बाद भैरवदेव से अपने रोग की मुक्ति के लिए प्रार्थना करें.

शत्रु बाधा से मिलती है मुक्ति

कालभैरव की पूजा करने से ग्रह बाधा और शत्रु बाधा दोनों से ही मुक्ति मिलती है. भगवान काल भैरव जी की कृपा पाने के लिए और उनकी अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए.

कुत्तों को खिलाएं मीठी रोटी

भगवान कालभैरव का वाहन कुत्ता है, इसलिए भैरव की कृपा पाने के लिए इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी अथवा गुड़ के पुए खिलाएं. ऐसा करने से आपके जीवन के कष्टों का निवारण होगा.

प्रेत बाधाएं होती हैं दूर

भगवान कालभैरव की उपासना से भूत, प्रेत एवं ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं. सभी नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए इस दिन ॐ कालभैरवाय नमः का जाप एवं कालभैरवाष्टक का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं. इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं. काल भी उससे दूर हो जाता है.

आर्थिक संकट का निदान

भैरवदेव को प्रसन्न करने के लिए कालाष्टमी के दिन चना-चिरौंजी, पेड़ा, काली उड़द और उड़द की दाल से बने व्यंजनों का भोग लगाना चाहिए. इस दिन देवी दुर्गा की पूजा का भी बहुत महत्व होता है. इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करने से आर्थिक संकट और शत्रु दोनों से ही मुक्ति मिलती है.

बढ़ती है सुख-समृद्धि

कालाष्टमी का व्रत रखकर भगवान भैरव की पूजा की जाती है. इसके साथ ही भगवान शिव और पार्वती की कथा और भजन करने से भी घर में सुख-समृद्धि आती हैं. कालाष्टमी के दिन भैरव पूजन से प्रेत और बुरी शक्तियां दूर भाग जाती हैं. भगवान भैरव का वाहन काला कुत्ता माना जाता है. इस दिन काले कुत्ते को रोटी जरूर खिलानी चाहिए. कालाष्टमी पर किसी पास के मंदिर में जाकर कालभैरव के सामने दीपक जलाना चाहिए.

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First Published : 02 February 2024, 09:37 AM IST