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सुंदरता ऐसी कि संत और ऋषि-मुनि भी पिघल गए, पढ़िए अप्सराओं की कहानी

Mythical story of Apsaras: पौराणिक कथाओं में अप्सराओं को देवराज इंद्र का एक अस्त्र बताया गया है. इनकी अद्भुत सुंदरता ऋषियों की तपस्या भंग करने और उन्हें मोहपाश में बांधने में सक्षम थी. इंद्र, जब किसी ऋषि की बढ़ती शक्ति से भयभीत होते थे, तो उन्हें रोकने के लिए अप्सराओं का सहारा लेते थे.

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Courtesy: AI generated Image

Mythical story of Apsaras: देवताओं और ऋषियों की दुनिया में हमेशा से ही एक अजीब रिश्ता रहा है. एक तरफ जहां देवता अपनी शक्तियों और भव्यता का प्रदर्शन करते थे, वहीं दूसरी तरफ ऋषि अपनी तपस्या और ज्ञान के लिए जाने जाते थे. लेकिन इसी रिश्ते में एक खास पहलू भी था - अप्सराओं का मोह-जाल.

अप्सराएं देवराज इंद्र की अद्भुत रचनाएं थीं. अलौकिक सौंदर्य से परिपूर्ण ये अप्सराएं अपनी मधुर वाणी और मनमोहक नृत्य से किसी को भी मोहित कर सकती थीं. इंद्र इन अप्सराओं का इस्तेमाल ऋषियों की तपस्या भंग करने के लिए करते थे. ऋषियों की बढ़ती शक्ति से डरकर इंद्र इन अप्सराओं को ऋषियों के पास भेजते थे, जिससे ऋषि तपस्या छोड़कर मोह-माया में खो जाते थे.

इस हथियार का इस्तेमाल कई ऋषियों पर किया गया, जिनमें से कुछ प्रसिद्ध कहानियां इस प्रकार हैं:

मेनका और विश्वामित्र की कहानी

विश्वामित्र एक महान ऋषि थे जो कठोर तपस्या में लीन थे. इंद्र, विश्वामित्र की शक्ति से ईर्ष्या करते थे, और उन्होंने मेनका नामक अप्सरा को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा. मेनका ऋषि के समक्ष मोहक रूप में प्रकट हुईं और धीरे-धीरे उनका ध्यान भंग करने में सफल रहीं. विश्वामित्र मेनका के प्रेम में पड़ गए और दोनों ने पति-पत्नी की तरह रहना शुरू कर दिया. कुछ समय बाद मेनका ने एक पुत्री को जन्म दिया और उसे ऋषि के पास छोड़कर स्वर्ग चली गईं. जब विश्वामित्र को मेनका और इंद्र के छल का ज्ञान हुआ तो उन्हें बहुत पश्चाताप हुआ. उन्होंने अपनी पुत्री को छोड़कर फिर से तपस्या में लीन हो गए.

शेषिरायण और रंभा की कहानी

भगवान श्रीकृष्ण के शत्रु कालयवन के पिता ऋषि शेषिरायण थे. एक दिन वे मार्ग से गुजर रहे थे तो उनकी नजर जल में क्रीड़ा कर रही अप्सरा रंभा पर पड़ी. रंभा का रूप देखकर ऋषि मोहित हो गए और उन दोनों के बीच संबंध बन गए. रंभा ने एक पुत्र को जन्म दिया. भगवान श्रीकृष्ण ने बड़ी चतुराई से कालयवन का वध करके ऋषि शेषिरायण और रंभा के पुत्र को राज्य दिलाया.

गौतम ऋषि और नामपदी की कहानी

इंद्र ने गौतम ऋषि की साधना भंग करने के लिए नामपदी नामक अप्सरा को भेजा. नामपदी के रूप को देखकर गौतम ऋषि कामाशक्त हो गए और उनका वीर्य सरकंडे पर गिर पड़ा. वीर्य से दो भागों में विभाजित होकर कृप और कृपी नामक दो बच्चे उत्पन्न हुए. कृप महाभारत में कौरवों की ओर से लड़े थे और कृपी का विवाह द्रोणाचार्य से हुआ था.

विभांडक ऋषि और उर्वशी की कहानी

विभांडक ऋषि की कठोर तपस्या से देवता चिंतित थे. उन्होंने उर्वशी नामक अप्सरा को ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए भेजा. उर्वशी के रूप को देखकर विभांडक ऋषि मोहित हो गए और उनके पुत्र श्रृंग ऋषि का जन्म हुआ. पुत्र जन्म के बाद उर्वशी स्वर्ग चली गई. विभांडक ऋषि ने अपने पुत्र को स्त्रियों से दूर रखने का संकल्प लिया.

घृताची और भारद्वाज मुनि की कहानी

घृताची अप्सराओं में सबसे सुंदर थीं. एक बार भारद्वाज मुनि गंगा से स्नान करके घर लौट रहे थे तो उनकी नजर घृताची पर पड़ी. घृताची के रूप को देखकर मुनि कामाशक्त हो गए और उनका वीर्यपात हो गया. उन्होंने वीर्य को धरती पर गिरने से रोका और एक मिट्टी के पात्र में डाल दिया. उस वीर्य से द्रोणाचार्य का जन्म हुआ.