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Saubhagya Sundari Vrat: पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है सौभाग्य सुंदरी व्रत, जानें पूजा-विधि व व्रत का लाभ

Saubhagya Sundari Vrat: सौभाग्य सुंदरी का व्रत तीज और करवा चौथ के समान ही महत्वपूर्ण होता है. सौभाग्य सुंदरी व्रत जीवन में सकारात्मकता और सौभाग्य लाने के लिए मनाया जाता है. महिलाएं पति और संतान सुख हेतु पूजा-अनुष्ठान कार्य करती हैं.

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Manish Pandey
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हाइलाइट्स

  • यह व्रत व्रत तीज और करवा चौथ के समान ही महत्वपूर्ण होता है.
  • इस व्रत से साधक को सौंदर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

आचार्य डॉ. विक्रमादित्य: मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को सौभाग्य सुंदरी व्रत रखा जाता है. इसमें भोलेनाथ और माता पार्वती की उपासना का विधान है. तृतीया तिथि, माता गौरी की जन्म तिथि मानी जाती है. मां पार्वती ने इसी तिथि में घोर तपस्या कर शंकर जी को वर-रूप में प्राप्त किया था इसके बाद गणेश और कार्तिक दो बेटे प्राप्त हुए तभी से मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को सौभाग्य सुंदरी की व्रत पूजा होती है.

सुहाग की रक्षा, पति की दीर्धायु और बेहतर स्वास्थ के लिए महिलाएं ये व्रत पूर विधि विधान से करती है. इस व्रत के परिणाम स्वरूप साधक को सौंदर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. विवाहिता इस व्रत में 16 श्रृंगार कर शंकर-पार्वती का पूजन करती हैं. सौभाग्य का अर्थ है भौतिक सुख, ऐश्वर्य, समृद्धि और सौंदर्य से तात्पर्य तन के साथ मन की सुंदरता. कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को यह दोनों प्राप्त होता है.

सौभाग्य सुंदरी का व्रत तीज और करवा चौथ के समान ही महत्वपूर्ण होता है. सौभाग्य सुंदरी व्रत जीवन में सकारात्मकता और सौभाग्य लाने के लिए मनाया जाता है. महिलाएं पति और संतान सुख हेतु पूजा-अनुष्ठान कार्य करती हैं. माना जाता है कि सौभाग्य सुंदरी व्रत का पालन करने से कोई भी अपने भाग्य को अच्छे के लिए बदल सकता है और एक सुखी और सफल जीवन जी सकता है. अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर की कामना के लिए इस व्रत को कर सकती हैं.

सौभाग्य सुंदरी व्रत पूजा-विधि
- सौभाग्य सुंदरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहने.
- इसके बाद पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी रखें और उसके ऊपर भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर रखें.
- फिर भोलेनाथ और माता पार्वती की विधि के अनुसार पूजा करें.
- पूजा करने के बाद भगवान शिव की आरती भी करें.
- भोलेनाथ को बेलपत्र, माता पार्वती को चढ़ाएं सुहाग सामग्री.

सौभाग्य सुंदरी व्रत के दिन पूजा करते समय माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, चूड़ियां और चुनरी चढ़ाएं और भगवान भोलेनाथ को धतूरा और बेलपत्र चढ़ाएं. इससे अखंड सौभग्य की प्राप्ति होती है और शादीशुदा जीवन सुखमय व्यतित होता है.

सौभाग्य सुंदरी व्रत के लाभ
- सौभाग्य सुंदरी व्रत वैवाहिक एवं सुखी जीवन की प्राप्ति हेतु किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व होता है.
- मान्यता है जो दंपति इस दिन साथ मिलकर शिव-पार्वती की उपासना करते हैं उनके कुंडली में मौजूद समस्त दोष दूर हो जाते हैं.
- जिन लोगों कुंडली में मांगलिक दोष होता है और शादी में परेशानियां आती हैं उन्हें यह व्रत जरूर करना चाहिए, इससे मंगल दोष की समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं.

सौभाग्य सुंदरी व्रत -मंत्र
शरणागत, दीनार्त, परित्राण, परायणे, सर्वस्यार्तिहरे देवि, नारायणि नमोस्तुते।।”
इन मंत्रों के जाप से व्रत कर रही महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. शादीशुदा जोड़ों के बीच अगाध प्रेम बढ़ता है. इन मंत्रों का नियमित जाप करने से जीवन में सफलता प्राप्त होती है.

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.comइन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.

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First Published : 30 November 2023, 09:28 AM IST