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गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदने की विद्या कैसे सीख गए थे अभिमन्यु, क्यों कुरुक्षेत्र में गई थी जान?

अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र का नाम अभिमन्यु था. ऐसी मान्यता है कि अभिमन्यु ने चक्रव्यूह भेदने की कला गर्भ में ही सीख ली थी. चक्रव्यूह तोड़ने की कला उन्हें अर्जुन की एक गलती की वजह से नहीं आई. आइए पढ़ते हैं ये कहानी.

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Abhimanyu
Courtesy: Social media

महाभारत के नायक अर्जुन के वीरपुत्र अभिमन्यु को कौन नहीं जानता. 16 वर्ष के अभिमन्यु ने एक समय में कौरवों के सेना में हाहाकार मचा दिया था. जब वे रणक्षेत्र में उतरते, कौरव सेना भागने लगती. वे युद्ध भूमि में अपने पिता की तरह महान पराक्रम दिखाते. उनसे अकले की लड़ाई में न तो कर्ण लड़पाते, न ही कृपाचार्य. अभिमन्यु ने रणक्षेत्र में अद्भुत कौशल दिखलाया. उनके प्र-पितामह भीष्म को भी आभास हो गया कि अर्जुन का पुत्र उन्हीं की तरह पराक्रमी है.

अभिमन्यु को यह पराक्रम विरासत में मिली थी. महाभारत के युद्ध में धर्मराज युधिष्ठिर को कौरव घेरकर बंदी बनाना चाहते थे. इसके लिए गुरु द्रोण ने चक्रव्यूह रच दिया. चक्रव्यूह में कहीं सम्राट युद्धिष्ठिर फंस न जाएं, इसके लिए अभिमन्यु ने कमान संभाल ली. भगवान कृष्ण ने उनसे कहा कि जाओ, अभिमन्यु चक्रव्यूह भेद दो. अभिमन्यु ने अपने बड़े पिता की रक्षा के लिए चक्रव्यूह भेदना शुरू कर दिया. उन्होंने मां के गर्भ में चक्रव्यूह भेदने की कला तो अपने पिता से सीख ली थी लेकिन कैसे सातवें द्वार को तोड़ते हैं, यह कला नहीं सीखी.

कैसे गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदने की कला सीख गए थे अभिमन्यु?
पंडित मायेश द्विवेदी बताते हैं कि अर्जुन, अपनी पत्नी सुभद्रा एक दिन रात में चक्रव्यूह के बारे में बता रहे थे. तब अभिमन्यु सुभद्रा के गर्भ में थे. उन्होंने चक्रव्यूह की रचना, 7 द्वारों की संरचना और उन्हें भेदने की कला के बारे में बता रहे थे. इतने में सुभद्रा को नींद आ गई और वे सो गईं. अर्जुन ने चक्रव्यूह के सातवें द्वार को तोड़ने की कला के बारे में बताया ही नहीं. अभिमन्यु मां के गर्भ में ये बातें सुन रहे थे. उन्होंने चक्रव्यूह भेदन की कला सीख ली थी.

कैसे अर्जुन की गलती से मारे गए अभिमन्यु?
भगवान कृष्ण ने अभिमन्यु से कहा कि चक्रव्यूह भेदो. वे भेदने के लिए आगे बढ़े. बड़े-बड़े महारथी उनसे डरकर भागने लगे. कौरव सेना के 7 महारथियों ने ऐसा व्यूह रच दिया जिसमें अभिमन्यु फंसने लगे. उन्होंने चक्रव्यूह भेदने की कला सीख ली थी लेकिन अर्जुन के अधूरे ज्ञान की वजह से वे चक्रव्यू तोड़ने की कला ही नहीं सीख पाए. उन्होंने अर्जुन से बाद में कभी यह शिक्षा ली भी नहीं. अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंस गए थे. जयद्रथ, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथियों ने एकसाथ युद्ध के नियम में छल करके तीर बरसाने लगे.

अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंसे थे. अर्जुन दूसरे महारथियों से लड़ रहे थे और उन्हें नहीं पता था कि अभिमन्यु ऐसी मुश्किलों में फंसा है. भीम, युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव जैसे महारथी चक्रव्यूह में घुस ही नहीं पा रहे थे. लड़ते लड़ते अभिमन्यु के घोड़े मारे गए. वे पैदल हो गए. अपनी रक्षा के लिए उन्होंने रथ का पहिया उठा लिया. उसे हथियार बनाकर लड़ रहे थे. रथ का पहिया टूट गया, उनकी तलवार भी टूट गई.

छल से कुरुक्षेत्र में मारे गए अभिमन्यु
युद्ध के नियम कहते हैं कि निहत्थे पर वार नहीं करना चाहिए. अभिमन्यु को निहत्था देखकर भी कौरव महारथियों ने उस पर बाण बरसाए. अभिमन्यु मारे गए. उन्हें छल से लोगों ने मार डाला. जयद्रथ ने निहत्थे  अभिमन्यु को तलवार से काट डाला. अर्जुन का वीर पुत्र कुरुक्षेत्र में छल से मारा गया.